जैविक मृदा में जैविक खाद का योगदान

जैविक मृदा

● जैविक खादों के प्रयोग से मृदा का जैविक स्तर बढ़ता है, जिससे लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है और मृदा काफी उपजाऊ बनी रहती है।
● जैविक खाद पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ प्रदान कराते हैं, जो मृदा में मौजूद सूक्ष्म जीवों के द्वारा पौधों को मिलते हैं जिससे पौधों स्वस्थ बनते हैं और उत्पादन बढ़ता है।
● रासायनिक खादों के मुकाबले जैविक खाद सस्ते, टिकाऊ तथा बनाने में आसान होते हैं।
इनके प्रयोग से मृदा में ह्यूमस की बढ़ोतरी होती है व मृदा की भौतिक दशा में सुधार होता है।

बिहार में जैविक उत्पादों का प्रमाणीकरण

बिहार राज्य के अधिकांश क्षेत्रों की मिट्टी एवं जलवायु जैविक खेती के अनुकूल है | यहाँ के कृषकों द्वारा जैविक खेती भी किया जा रहा है परन्तु राज्य में उत्पादित जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण की कोई सरकारी अथवा गैर सरकारी एजेंसी नहीं होने के कारण प्रमाणीकरण का कार्य पूर्णतया बाहरी एजेंसियों पर निर्भर है | इस कारण कृषकों द्वारा काफी पैसे खर्च करने के बावजूद समय पर प्रमाणीकरण का कार्य नहीं हो पता है |

सी पी पी

सी पी पी ( Cow Pat Pit) या गाय के ताजे गोबर गोबर की खाद :-

जगह का चुनाव:-
ऐसे स्थान का चुनाव करें जहाँ पानी जमा न होता हो एवं बरसात का पानी आसानी से निकल जाये। इसे किसी छायादार पेड़ के नीचे न बनायें। किसी कुएँ या तालाब के आस-पास बनायें। बनाने की जगह कोई नजदीक कोई विषैले पदार्थ या प्रदुषण न हो।

संसाधन: -
गाय का गोबर 70-80 किलोग्राम
अंडे का छिलका( पिसा हुआ) – 200 ग्राम
पत्थर का चूर्ण- 200 ग्राम
बायोडायनामिक कम्पोस्ट – 3 सेट
जला हुआ ईटा- 200 नम्बर
जूट का बोरा – एक

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