बीजमृत

बिजम्रित बीजों के शोधन के लिए बनता है ताकि बीज को ज़मीन से होने वाली बीमारी न लगे और मजबूत पौधा तैयार हो... बिजाम्रित बनाने क लिए १०० किलो बीज के लिए, ५ किलो देसी गाय का गोबर, ५ लीटर गोमूत्र, ५० ग्राम खाने वाला चुना , १ हाथ पुराने पेड़ की मिटटी और २० लीटर पानी. ये सब खोलकर २४ खंटे रखे, फिर इसमें से बीजों को धोकर हलकी धुप या छाँव में सुखाकर बीज की बुआई करे...

एक एकड़ भूमि शोधन

2 किलो ट्रायकोडर्मा 
2 किलो स्यूडोमोनास
को अलग अलग 50-50 किलो तैयार गोबर खाद में मिला कर ठंडी जगह छाँव में गोबर को फैला दें
उपयुक्त नमी के लिए पानी छिड़के
तीसरे दिन हाथ निकाल दो
पुआल से ढक कर रखें
15 दिन में आपके पास 50-50 किलो जीव होंगे ट्रायकोडर्मा और स्यूडोमोनास

शाम को सूरज ढलने के बाद  बुवाई के लिए तैयार खेत में फैला कर जुताई से मिटटी में मिला दो
अगली सुबह उपचारित बीज बो दें।

जहां ट्रायकोडरमा आपकी फसल को हानिकारक फफूंद से बचाता है 

बीज अंकुरण

अच्छी देसी तथा उन्नत किस्म का चुनाव करने के बाद भी बोने से पहले दो काम ज़रूर करने चाहियें. एक तो बोने से पहले ही अंकुरण कर के पड़ताल कर के देख लें कि बीज अच्छा है या नहीं. अच्छा बीज होने पर भी बीज-उपचार कर के ही बुआई करें.

बीजोपचार का कृषि मे महत्व

कृषि क्षेत्र की प्राथमिकता उत्पादकता को बनाये रखने तथा बढ़ाने मे बीज का महत्वपूर्ण स्थान है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए उत्तम बीज का होना अनिवार्य है। उत्तम बीजों के चुनाव के बाद उनका उचित बीजोपचार भी जरूरी है क्यों कि बहुत से रोग बीजो से फैलते है। अतः रोग जनको, कीटों एवं असामान्य परिस्थितियों से बीज को बचाने के लिए बीजोपचार एक महत्वपूर्ण उपाय है।

बीजोपचार के लाभ

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