ये टीके अपनाये, फसलों का उत्पादन बढ़ाएं

Jaiv Urwarak Teeke

वैज्ञानिकों ने 12 प्रकार के टीके तैयार किए हैं, जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए आगे आएं किसान

नील हरित शैवाल जनित जैव उर्वरक

हरित क्रान्ति के उपरान्त करीब विगत चार दशकों से अधिक अन्न उपजाने के लिए अन्धा-धुंध कृषि रसायनों तथा रासायनिक खादों के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति दिन प्रतिदिन घटती जा रही है तथा मृदा प्रदुषण बढ़ता चला जा रहा है और भूमि के स्वास्थ को अच्छा रखने वाले सुक्ष्म जीवों की संख्या घटती जा रही है। अतएव अब धान की पैदावार प्रति हे.

फ़सल अवशेषों ना जलाऐं, इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढाऐं

हमारे देश में फ़सलों के अवशेषों (Crop Residue) का उचित प्रबन्ध करने पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है या कहें कि इसका उपयोग मृदा में जीवांश पदार्थ अथवा नत्रजन की मात्रा बढाने के लिये नही किया जाकर इनका अधिकतर भाग या तो दूसरे घरेलू उपयोग में किया जाता है या फ़िर इन्हें नष्ट कर दिया जाता है जैसे कि गेहूं, गन्ने की हरी पत्तियां, आलू, मूली, की पत्तियां पशुओं को खिलाने में उपयोग की जाती है या फ़िर फ़ेंक दी जाती हैं। कपास, सनई, अरहर आदि के तने गन्ने की सूखी पत्तियां, धान का पुआल आदि सभी अधिकतर जलाने के काम में उपयोग कर लिये जाते हैं।

एक उत्तम कोटि का खाद कृमि खाद

VermiCompost, Compost

अपशिष्ट या कूड़ा-करकट का मतलब है इधर-उधर बिखरे हुए संसाधन। बड़ी संख्या में कार्बनिक पदार्थ कृषि गतिविधियों, डेयरी फार्म और पशुओं से प्राप्त होते हैं जिसे घर के बाहर एक कोने में जमा किया जाता है। जहाँ वह सड़-गल कर दुर्गंध फैलाता है। इस महत्वपूर्ण संसाधन को मूल्य आधारित तैयार माल के रूप में अर्थात् खाद के रूप में परिवर्तित कर उपयोग में लाया जा सकता है। कार्बनिक अपशिष्ट का खाद के रूप में परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य केवल ठोस अपशिष्ट का निपटान करना ही नहीं अपितु एक उत्तम कोटि का खाद भी तैयार करना है जो हमारे खेत को उचित पोषक तत्व प्रदान करें।
 

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