साकेत प्रवेशिका 07 में चर्चा(11/09/2017): कृत्रिम रसायनों के प्रयोग से खेतों में क्या परिवर्तन हुए

बाबुलाल धाकड़ MP: जमीन की उत्पादन क्षमता कमजोर हो गई

पंकज त्यागी UP: फसलों और बीमारीयो मे बढोतरी।

विकाश शुक्ला UP: मित्रकितो का मरना।मिट्टी का कड़ापन

सुरेश द्विवेदी HR: सरजी खेतो की उपज कम हुई है लम्बे अंतराल के बंजर के बराबर। निचे का पानी भी दूषित हुआ है

शंकरसिंह UP: खेत कड़कपन आगया पहले जहाँ बैलो से जुताई हो रही थी वहीँ अब ज्यादा पावर के ट्रैक्टर से भी नहीं हो रही है उपजाऊ क्षमता कम हो गई फसल की गुणवत्ता भी कम हो गई।।।

साकेत प्रवेशिका 06 (व्हाट्सएप्प ग्रुप) प्रशिक्षण समूह में "किसान अपना उन्नत बीज कैसे बनाएं" विषय पर हुई चर्चा के मुख्य अंश।

दिनांक: 31- 08- 2017, 
प्रशिक्षक: नितिन काजला
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निबौली सत् एक सस्ता घरेलू जैविक कीटनाशक

कृषि प्रधान देश भारत में दिनो  दिन बढ़ती आवादी का सीधा प्रभाव खाद्यान्न पर है। पिछले वषों में अनाज का उत्पादन तो बढ़ा है, परन्तु इसको सावधानी से संरक्षित न किया जाय तो इसमें घुन, कीड़े, सूड़ी व फंफूद लगने की सम्भावना बढ़ जाती है, तथा यह खाने व बीज योग्य नहीं रहता है खाद्यान्नों के भण्ड़ारण के लिए जो कीटनाशी या रसायन प्रयोग में लाये जाते हैं वे प्रायः जहरीले होते हैं जिसके कारण प्राणी जीव पर इसका विपरीत कुप्रभाव पड़ता है। इस प्रकार संरक्षित अनाज बिना धन खर्च किये मानव के लिए भी पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक रहेगा। प्राणी जीव एवं खाद्यान्नों के भण्ड़ारण में नीम का उपयोग इस प्रकार है।

19 खरब 50 अरब 40 करोड़ का सालाना व्यापार बस हम सब को बीमार बनाने के लिऐ हो रहा है

19 खरब 50 अरब 40 करोड़ का सालाना व्यापार बस हम सब को बीमार बनाने के लिऐ हो रहा है। नहीं विश्वास हो रहा ना इस अणपढ़ जाट की बात पर तो ये लेख ध्यान से पढ़णा:-

बौद्धिक लड़ाई ना एक दिन में लड़ी जाती और ना जीती जाती, इस के लिए तो सैकड़ों साल लगते हैं और पीढियाँ की पीढियाँ खप जाती हैं। एक बौद्धिक लड़ाई है जैविक कृषि बनाम रसायनिक कृषि और अंत में विजय जैविक खेती की ही होनी है कंपनियां चाहे जो मर्जी कर लें।

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